जालंधर पंजाब दैनिक न्यूज़ (तानिया ) औरत दिवस अंग्रेजी में वुमन डे नेशनल और इंटरनेशनल में इसको त्यौहार की तरह मनाया जा रहा है । एक औरत घर और बाहर हर किसी के साथ हर तरह का रिश्ता निभाती है। अपने आंसू छुपा कर दूसरों के दूसरों को खुश रखती है। खुद भूखा रहकर घर में,बाहर हर किसी भूखे का पेट भर्ती है ।अगर एक औरत को मां का दर्जा दिया गया है, तो औरत को इस शब्द पर गर्व किया है कि उसे मां का दर्जा दिया गया। एक औरत मां ,बहन, पत्नी ,बहू, बेटी आदि अपने का कर्तव्य निभाती है। फिर क्यों इस देश में आज भी एक लड़की दुष्कर्म होती है ।क्यों आज भी इसका परिणाम एक औरत को दिया जाता है कि औरत अपने बच्चों को समझाती नहीं या घर में औरत की प्रवृत्ति गलत की गई है और उसको इसका नतीजा बाहर जाकर इनकी हानि उठाते हैं एक औरत कभी भी किसी का गलत नहीं सोचते लेकिन बच्चे कितने भी बड़े ही हो जाए फिर भी उसे गलत और ठीक से रोकती है। बच्चों को देखना घर की देखभाल में हमेशा बिना अपने परिवार के आगे बढ़ती रहती है ।2020 में चल रही महामारी करो ना कि नहीं भी हर किसी को जहां बच्चे से लेकर बूढ़े तक की सोचने और समझने की क्षमता बिल्कुल नहीं थी। लेकिन उस समय में एक औरत घर में हर तरह क्या रूप बन बनकर सब की देखभाल करती रही जहां बच्चों को पढ़ाई में फर्क ना आए वहां एक मां, अध्यापक बनाकर बच्चों की शिक्षा दे रही थी लॉकडाउन लगा फिर औरत ने दिन-प्रतिदिन नए नए पकवान बनाकर घर परिवार में एक साथ मिलकर पार्टी का माहौल बना कर उस बीमारी से लड़ना सिखाया और ध्यान रखा आज भी आज ही क्यों अगर दिन प्रतिदिन औरत का आदर हो तो एक दिन हमारे पूरे संसार में जो लड़की एक लड़की के साथ दुष्कर्म होता है वह खत्म हो जाए एक औरत कभी किसी से भी प्यार इज्जत के इलावा कुछ नहीं मांगती आज ही क्यों हमें हर दिन एक औरत को सम्मान देना चाहिए ।आज के दौर से दौर में हर औरत पुरुष के मुताबिक चलने के बजाय उससे आगे चलती है । वह हर जगह औरत आगे रहती है दुनिया को सहारा देने वाला एक बार ही होता है और आज के समय में लोग सोचते हैं कि औरत है वह कमजोर है। अगर वह बाहर निकलती है तो समाज आज के समय में भी उसको जीने नहीं देता ताने मारते हैं ,कि खेलकूद मैं लड़कियां क्या है ,क्या कर देगी, लड़कियां तो कमजोर होती हैं। कहां लड़ेगी शादी के बाद तो घर रहते हैं और बच्चों को ही संभाला होता है ।लड़की है घर से दूर जाकर करेगी क्या इसका ध्यान रखेगा कौन ? हम इतना क्यों सोचते हैं अपनी क्षमता हम सही रास्ते क्यों नहीं लेकर जा सकते जेकर आज के समय में हम अपनी सोच को बदलें और औरत का आदर करें अगर हर दिन औरत को आदत दिया जाएगा तो एक दिन हम खुद को शाबाशी देंगे औरत कभी भी खिलौना नहीं होती ।वह तो परमात्मा के बाद पूजनीय व्यक्ति है जो मौत के गोद में जाकर जिंदगी को जन्म तिथि है।

तानिया ,
खिंगरा गेट
जालंधर (पंजाब दैनिक न्यूज़ )

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