( पंजाब दैनिक न्यूज़ ) दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। दिवाली के अगले दिन मनाए जाने वाले त्यौहार गोवर्धन पूजा का बेहद महत्व है। इसी दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी की जाती है।

विश्वकर्मा देव शिल्प माने जाते है जिनका जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। इन्हें यांत्रिक विज्ञानं तथा वास्तु कला का जनक कहा जाता है। । फैक्ट्री के मजदूर , मिस्त्री , कारीगर , शिल्पकार , फर्नीचर बनाने वाले , मशीनों पर काम करने वाले लोग इस दिन मशीनों औजारों आदि की साफ सफाई करते है , उनकी पूजा करते है तथा भक्ति भाव और हर्षोल्लास से भगवान विश्कर्मा का पूजन किया जाता है। इस दिन को और भी ज़्यादा सफल कैसे मनाया जाए,

क्या है पूजा की सही विधि जानिए ज्योतिषाचार्य नवनीत राणा जी से….
विश्वकर्मा देव शिल्पकार माने जाते हैं जिनका जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। भगवान विश्वकर्मा की जयंती वैसे तो 17 सितंबर को होती है लेकिन गोवर्धन पूजा के इनकी विशेष पूजा किए जाने का प्रावधान है। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के वास्तुकार माने गए हैं। इन्हें यांत्रिक विज्ञानं तथा वास्तु कला का जनक कहा जाता है। फैक्ट्री आदि में काम करने वाले मजदूर , मिस्त्री, कारीगर, शिल्पकार, फर्नीचर बनाने वाले, मशीनों पर काम करने वाले लोग गोवर्धन पूजा के दिन मशीनों औजारों आदि की साफ सफाई करते है, पूजा करते हैं और श्रद्धापूर्वक भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है।

गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है

पौराणिक कथानुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर संपूर्ण गोकुल वासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की थी। इंद्र के अभिमान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से कहा था कि ‘कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। गोवर्धन पर्वत से गोकुल वासियों को पशुओं के लिए चारा मिलता है और यही पर्वत यहां बादलों को रोककर वर्षा करवाता है, जिससे कृषि उन्नत होती है। इसलिए गोवर्धन की पूजा की जानी चाहिए। तभी से गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान है।

इसलिए लगता है 56 भोग वहीं एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, आज के दिन अन्नकूट इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इंद्र के कोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए जब कान्हा ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया तब गोकुल वासियों ने 56 भोग बनाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाया था। इससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने गोकुल वासियों को आशीर्वाद दिया कि वह गोकुल वासियों की रक्षा करेंगे।

अन्नकूट बनाने की विधि अन्नकूट बनाने के लिए सभी मौसमी सब्जियां, दूध, मावा, सूखे मेवे और चावल का प्रयोग किया जाता है। साथ ही ताजे फल और मिष्ठान से भगवान को भोग लाया जाता है। अन्नकूट में 56 प्रकार के खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। इन सभी से प्रदोष काल (शाम के समय) में विधि-विधान से श्रीकृष्ण भगवान की पूजा की जाती है। इसके साथ ही गाय की पूजा कर उसे गुड़ और हरा चारा खिलाना शुभ माना जाता है।

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