(पंजाब दैनिक न्यूज़)  20 साल बाद लद्दाख का  देश से जुड़ेेेे रहने का सपना साकार हुआI ये इकलौता ऐसा रास्ता होगा जिसके जरिए भारी बर्फबारी में भी लेह और कारगिल का सड़क मार्ग खुला रहेगाI इस रास्ते पर आने वाले इकलौते पास शिंगुला पर टनल बनाने का काम शुरू हो रहा है जिसमें तीन साल का समय लगेगाIअब लद्दाख को साल भर देश से जोड़े रह पाना संभव हो जाएगाI दरअसल रोहतांग पास के नीचे से निकलने वाली टनल के शुरू होते ही लद्दाख तक पहुंचने का सबसे छोटा और सबसे आसाना रास्ता भी खुल जाएगाI ये रास्ता होगा मनाली से हिमाचल के दार्चा, शिंकुला पास से होते हुए लद्दाख की जांस्कार वैली के जरिए आगे बढ़ेगाI

नए रूट की खासियत:  इस रास्ते में बर्फबारी कम है और ज्यादातर रास्ता नदी के साथ-साथ चलता हैI इसलिए ये इकलौता ऐसा रास्ता होगा जिसके जरिए भारी बर्फबारी में भी लेह और कारगिल का सड़क मार्ग खुला रहेगाI इस रास्ते पर आने वाले इकलौते पास शिंगुला पर टनल बनाने का काम शुरू हो रहा है जिसमें तीन साल का समय लगेगाI लेकिन इस टनल के बनने से पहले ही ये रास्ता लद्दाख के लिए तीसरा रास्ता बनने को तैयार हैI

अभी तक कारगिल या लेह पहुंचने के लिए दो ही रास्ते थेI एक रास्ता श्रीनगर से ज़ोज़िला पास पार करके कारगिल और लेह पहुंचने का है और दूसरा रास्ता मनाली से रोहतांग, लाचुंग ला, बारालाचला और तंगलांग ला होते हुए लेह और उसके बाद कारगिल पहुंचने का, लेकिन दोनों ही रास्ते साल के कुछ ही महीने खुले रहते हैं बाकी समय ऊंचे दर्रों पर भारी बर्फबारी के कारण बंद रहते हैंI

रणनीतिक अहमियत: कारगिल युद्ध के समय ही एक तीसरे रास्ते की योजना बनाई गई थी जिसके ज़रिए साल भर लद्दाख का सड़क मार्ग खोला जा सकेI ये आबादी के लिए भी फायदेमंद था और सेना के लिए भी जिसे गर्मियों के चार महीने में ही पूरे साल की रसद जमा करनी होती थीI अगर दुश्मन एक रास्ता बंद कर दे तो सेना के लिए संकट और बढ़ जाता है जैसा 1999 में कारगिल में हुआ थाI रास्ता लंबा भी हैI लेह से मनाली की दूरी 475 किमी है लेकिन चार दर्रों को अच्छे मौसम में भी पार करके सफर पूरा करने में दो दिन तक का समय लग जाता हैI

अभी 200 प्वाइंट पर एवलांच का खतरा: मनाली से दार्चा होते हुए 16600 फीट ऊंचे शिंकुला दर्रे को पार करके सड़क लद्दाख की ज़ांस्कार घाटी में उतरती हैI यही इस सड़क का सबसे ऊंचा स्थान हैI लेकिन यहां बर्फबारी कम होती है केवल एक जगह एवलांच का खतरा हैI वहीं पुराने लेह-मनाली हाईवे पर 200 जगहें ऐसी हैं जहां पर एवलांच का खतरा है. इस सड़क को लेह से 100 किमी दूरी खलत्से में लेह-श्रीनगर हाई वे से जोड़ा गया हैI यानी मनाली से कारगिल जाने के लिए साल भर खुली रहने वाली इस सड़क से दूरी 485 किमी रह जाएगी जो पहले 700 किमी थीI इस सड़क पर केवल एक पास और पहाड़ों के नीचे से जाने के कारण ये दूरी भी 9-10 घंटे में तय हो जाएगीI
16 रोड्स बॉर्डर टास्क फोर्स के कमांडर मनोज कुमार जैन के मुताबिक लेह को इस सड़क से जोड़ने से मनाली की 475 किमी की दूरी घटकर लगभग 400 किमी रह जाएगी लेकिन इसके लिए अभी निम्मू से आगे 30 किमी के रास्ते को जोड़ना हैI यहां पहाड़ों को काटकर सड़क बनाने का काम पूरी रफ्तार से चल रहा हैI अगले तीन साल में शिंगुला पर टनल भी बन जाएगी और तब तक हम बचे हुए रास्ते को भी पूरा कर लेंगेI फिर लेह से मनाली जाना कुछ घंटों का सुरक्षित सफर बन जाएगाI

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