(पंजाब दैनिक न्यूज़) अकेलापन, एकांत स्थान में रहने या एकाकीपन से अलग है क्योंकि इस तरह का अकेलापन अवांछित है जो व्यक्ति के लिए दर्द या दुख का कारण बनता हैI किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जो अकेला हैI उसे भीड़ के बीच जा शुभचिंतकों से घिरे रहने के दौरान भी अकेलापन ही अनुभव होता हैI अकेलापन एक भावना हैI यह आमतौर पर नकारात्मक भावनाओं से जुड़ा होता है जो हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता हैI ऐसे लोग जो अकेले हैं या बुरे रिश्तो में फंसे हैं जहां बहुत झगड़ा होता है या जहां उन्हें लगता है कि वह अपने साथी पर भरोसा नहीं कर सकते या उन पर पूरी तरह से निर्भर नहीं कर सकते, उन लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में गिरावट का अनुभव होता हैI वैसे तो अकेलेपन को किसी मानसिक बीमारी के रूप में नहीं माना जाता है बावजूद इसके कुछ सामान्य लक्षण और संकेत हैं जिनकी आपको अनदेखी नहीं करनी चाहिए जैसे भीड़ में रहने या दोस्तों परिवार के लोग और सहकर्मियों से घिरा होने के बावजूद अकेलापन महसूस करना.. लोगों के साथ गहराई में उतरकर संबंध बनाने में अक्षमता महसूस होना या दूसरों के साथ संपर्क स्थापित करने की कोशिश में थकान महसूस होना… खुद पर संदेह होना अयोग्यता महसूस होना… चिंता या बेचैनी की भावना… बहुत कम या बहुत अधिक सोना या नींद में बार बार बाधा आना… शरीर में ऊर्जा और उत्साह की कमी… भूख ना लगना… शरीर दर्द करना… अधिक शॉपिंग करना या फिल्मी और शोज बहुत ज्यादा देखना… ऐसा महसूस होना कि आपका किसी के साथ कोई संबंध नहीं है इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए I
अकेलेपन का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि अकेलेपन का अंतर्निहित कारण क्या है इसका इलाज संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी, ड्रग थेरेपी और जीवनशैली में बदलाव आदि से किया जा सकता है… संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी: एक प्रकार की टाक थेरेपी है जिसमें एक प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक मरीज के दृष्टिकोण को बदलने में मदद करने के लिए उन्हें खुद को उनके रिश्तो को और उनके जीवन को अधिक सकारात्मक दृष्टि से देखने में उनकी मदद करता है यह थेरेपी सभी उम्र के लोगों पर सकारात्मक असर डालती हैI.. ड्रग थेरेपी: अगर आपके अकेलेपन का कारण अवसाद जैसी कोई चिकित्सीय स्थिति है तो चिकित्सक एंटीडिप्रेसेंट या एंटीसाइकोटिक दवाइयां प्रिसक्राइब करते हैं I… जीवन शैली में बदलाव: डॉक्टर आपको अपने खान-पान और वर्कआउट रूटीन में भी बदलाव करने की सलाह दे सकते हैं जो लोग अकेलापन महसूस करते हैं वह कम वर्कआउट करते हैं एक्सरसाइज करने से फीलगुड हारमोंस रिलीज होता है इसलिए अकेलेपन का शिकार लोगों की रूटीन में अगर एक्सरसाइज को शामिल किया जाए तो इससे काफी मदद हो सकती है और इन बातों को याद रखें कि अकेलेपन को सामाजिक अलगाव के तौर पर देखा जाता हैI यह उस अंतर से उत्पन्न हो सकता है कि हम वास्तविक जीवन में कितने कनेक्शन बनाना चाहते हैं और वास्तव में कितने कनेक्शन हमारे पास है अकेलापन एक उपयोगी प्रेरणा हो सकता है जो हमें बाहर जाने और अधिक कनेक्शन की तलाश करने के लिए प्रेरित करता है लेकिन यह एक नकारात्मक भावना भी हो सकती है जिसका हमारी सेहत पर दूरगामी परिणाम होते हैं अकेलापन वास्तव में कोई बीमारी नहीं है लेकिन इसकी वजह से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है खुद में और अपने प्रिय जनों में अकेलेपन के संकेतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है व जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ आगे जरूर बढ़ाएं Iउन विचारों को अपने से दूर रखें, जो आपको परेशान करते हैं। जिंदगी में होने वाली हर अच्छी बातों पर ध्यान केंद्रित करें।
खुद के लिए थोड़ा वक्त निकालें। ऐसा करके आप अकेलेपन के कारणों को ढूंढ सकते हैं। अकेलापन महसूस हो, तो टहलने चलें जाएं। मेडिटेशन करें। अच्छी सी कोई मजेदार फिल्म देखें। गाना सुनें। खुद को जीवंत करने की कोशिश करें।खुद से प्‍यार करें। आपको आपसे ज्यादा कोई दूसरा नहीं जानता होगा इसलिए अपनी अच्‍छी या बुरी चीजों को समझें। जरूरत पड़ने पर उसमें बदलाव करें। जिंदगी के हर एक पल बहुत अनमोल हैं, इनको यूं ही अकेले रहकर न गंवाएं, इसे जी-भरकर इंज्‍वॉय करें।अपने अंदर की रचनात्‍मकता को बाहर निकालें। आपके अंदर जो भी खासियत छुपी हुई है, उसे बाहर लाएं। अपने अधूरे शौक को पूरा करें। नई एक्टिविटीज में हिस्सा लें।अकेलेपन को दूर करने के लिए नए लोगों से मिलें, दोस्ती का दायरा बढ़ाएं। अपने परिवार के लोगों से फोन और सोशल मीडिया पर जुड़े रहें। दोस्‍तों के साथ थोड़ा वक्‍त बिताएं, इससे आपको अच्‍छा लगेगा और अकेलेपन का एहसास भी नहीं होगा।

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