जालंधर (मुनीश तोखी ) बीड़ी या सिगरेट पीना, तंबाकू चबाना या पीना या फिर नसवार सूंघना- ये सभी क्रियाएँ कैंसर जैसी नामुराद बीमारी को खुला आमंत्रण देती है। तंबाकू एक भयानक नशा है, जिसका सेवन सेहत के लिए हानिकारक है। इसी जागरूकता मुहिम को लोगों तक फैलाने के लिए दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने अपने नशा उन्मूलन कार्यक्रम बोध के अंर्तग्रत एक सेमीनार का आयोजन किया जिसमें दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के वॉलयनटीयर्स ने नशे के विरूद्ध लोगों को जागरूक किया। लोगों को जागरूक करते हुए संस्थान की प्रवक्ता साध्वी रवनीत भारती ने कहा कि नशे की कैद में जकड़े आज के समाज को इसकी बुरी लत लग गई है, अधिकतर युवा वर्ग इसका गुलाम हो गया है। डॉ संदीप ने बताया कि तंबाकू का वनस्पति विज्ञान में नाम निकोटीना टेबेकम है और इसको अमरीकन हर्ब भी कहा जाता है। इसके पीछे भी एक कारण है। इतिहास बताता है कि तंबाकू का सबसे पहले इस्तेमाल अमरीका में हुआ था। कोल बस 1492 में जब अमरीका पहुँचा तो उसने अपने मल्लाह को उस टापू के हालात पता करने के लिए भेजा। जब मल्लाह वापस आया तो उसने उनको बताया कि वह एक अनोखी बात देखकर आया हैं, यहाँ के लोग अपनी नाक व मुँह से धुआँ निकालते हैं । साध्वी जी ने बताया कि भारत में पुर्तगाली तंबाकू लेकर आए। उन्होंने कहा कि इसका सेवन तो पशु भी नहीं करते, वे भी मुँह फेर लेते हैं। किन्तु हैरानी की बात है जिस घास से पशुओं ने मुँह फेर लिया उसे मनुष्य दिन रात खा रहा है। जिस वक्त कोई तंबाकू खरीदता है, तो उस पर लिखी चेतावनी – तंबाकू का सेवन हानिकारक है को पढ़ता तो है , लेकिन फि र भी अपना जीवन बर्बाद किए जा रहा है। आज जितने भी हार्ट अटैक और कैंसर जैसे भयानक रोग है यह तंबाकू के सेवन का ही फ ल है। यह बात नहीं कि इसकी रोकथाम हेतु कदम नहीं उठाए गए। बादशाह जहांगीर ने तो यह ऐलान किया था कि जो भी तंबाकू का सेवन करेगा उसके होंठ काट दिए जाएँगें। बहुत से कानून और नियम बनाए गए परन्तु विडंबना यह है कि इतने कानून और नियमों के बाद भी समाज में परिवर्तन नहीं हैं इसका एक मात्र कारण यह है कि परिवर्तन तो भीतर से आता है साध्वी जी ने कहा कि इस समस्या की जड़ एक व्यक्ति का शरीर नहीं बल्कि उसका मन है। इसलिए यदि नशे की लत को खत्म करना है तो लोगों की मानसिकता को बदलना होगा जो कि अध्यात्म द्वारा ही संभव हैं और संस्थान ध्यान पद्धति , आत्मिक बोध, नशा उन्मूलन शिविर लगाकर लोगों की मानसिकता को बदल रहा हैं।

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