जालंधर (मुनीश तोखी ) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अमृतसर रोड बिधिपुर आश्रम में सप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया । जिसमें सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी चंद्रिका भारती जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि अध्यात्म भक्ति ,धर्म , साधना तो वे विशाल पंख है । जो विराटता के क्षितिज पर हमें उडान भरवाते है । फिर भला स्वार्थपुर्ण बंधनों के कारक कैसे हो सकते है ? धर्म के मर्म को न जानने वाले कुछ स्वार्थी लोगों ने ही इन गरिमामई शबदों की इतनी संकीर्ण व छिछली व्याखया की है , धर्म कतई नही चााहता कि आपने अगर साधना का संकल्प लिया है तो सामाज में फैली कुरीतियों के प्रति आखें मुंद कर बैठ जाएँ । निकष्क्रय होकर जो हो रहा ,उसके मात्र मूकदर्शक बन जाएँ । सामाज के प्रति अपने सब कर्तव्यों को त्यागकर , आसपास व्याप्त विकृतियों को दूर करने कर प्रयास ही न करें यदि ऐसा होता तो गुरूओं संतों के इतिहास में अपने शिरूयों द्वारा अधम का विनाश नही करते । परन्तु उसके लिए आवश्यक है , सच्ची आध्यात्मिकता को हृदय में धारण कर लेना ही धर्म की वास्तविक परिभाषा है । महापुरूष अकसर कहते है । धर्म के चिन्हों को धारण करने से धार्मिक नही बना जा सकता ,अपितु गुरू कृपा से ईश्वर के तत्व रूप का दर्शन कर व सदवृतियों को धारण करने से धार्मिक बना जा सकता है । यही सच्चा धर्म हमें परमार्थ का वह विशाल दृष्टिकोण प्रदान करता है ।

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