जालंधर (मुनीश तोखी ) श्री आशुतोष महाराज जी कृपा से दिव्य ज्योति जाग्रति ओर से अध्यात्मिक्ता के साथ-साथ सामाजिक कल्याण हेतु अभावग्रस्त वर्ग (झुग्गी, झोपड़ी में रहने वाले) के लोगों के लिए पूरे भारत में संपूर्ण विकास केन्द्र मंथन के अंतर्गत चलाए जा रहे हैं। इन केन्द्रों की वास्तविक्ता यह है कि यह केवल सूचना प्रसार या किताबी ज्ञान के केन्द्र नहीं हैं, अपितु उनके संपूर्ण विकास एवं वृद्धि के केन्द्र हैं। इन केन्द्रों में शिक्षित बच्चे शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास के साथ पूर्ण व्यक्तिव में उभर कर समाज में एक नई पहचान बना रहें हैं। इसी श्रंखला के अंतर्गत लुधियाना केन्द्र की ओर से बच्चे अपनी इस नई पहचान की प्रस्तुतिकरण हेतु नूरमहल में विशेष रूप आमंत्रित किए गए। कार्यक्रम की शुरूआत में मंच की प्रक्रिया निभाते हुए श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साधवी रजनी भारती जी ने बताया कि मंथन का अर्थ है कि मथना और जो भी छुपा हुआ है, मथ कर उसको बाहर निकालना। हम सभी जानते हैं कि जब देवताओं और राक्षसों ने समुद्र मंथन किया तो बहुत सारी चीजें निकल कर बाहर आई। इसी प्रकार मंथन के द्वारा इन बच्चों का छिपा हुआ टैलेंट बाहर आ रहा है। इसके बाद कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति मंथन स्कूल के बच्चों द्वारा परार्थना से की गई। साधवी कपिला भारती जी ने शिक्षा का महत्व समझाते हुए कहा कि स्वयं की, समाज की एवं राष्ट्र की उन्नति के लिए जीवन में शिक्षा का होना परम आवश्यक है। शिक्षा के इसी महत्व के संदेश को संपूर्ण समाज में देने के लिए बच्चों ने डा आनंदीबाई जोशी के जीवन की वास्तविक घटना पर आधारित एक नाटक का प्रस्तुतिकरण किया। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए इस कार्यक्रम में उनके द्वारा खेलें एवं ऐक्टिविटी करवाई गई।श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी गुरुकिरपानंद जी ने बताया कि जिस मनुष्य का व्यक्तित्व उच्च नैतिक गुणों से परिपूर्ण है केवल वही राष्ट्र की एक ज़िम्मेदार व्यक्ति के रूप में सेवा कर सकता है। बच्चें जो कि राष्ट्र का भविष्य हैं, यदि उन्हें सही समय पर सही दिशा प्राप्त हो जाए तो संभावनाएं साकार हो जाती है और भविष्य निखर उठता है। इसके बाद स्वामी विश्वानंद जी ने बताया कि आज का बच्चा साक्षर तो हो सकता है किन्तु सुशिक्षित नहीं है और सभ्य एवं सुशिक्षित की उदाहरण मंथन स्कूल के बच्चों में देखने को मिल रही है। इस कार्यक्रम में उमा प्रकाश कुंदी (अध्यक्ष, आर्य इंस्टिचुट),मनोहर लाल तकियार (उपाध्यक्ष, आर्यइंस्टिचुट ), पंडित नत्थू राम (सचिव, आर्यइंस्टिचुट ),जतिंदर कुमार नय्यर (सदस्य, आर्य इंस्टिचुट, गौरव शर्मा (वकील, आर्यइंस्टिचुट ),नितीन खोसला (सदस्यआर्यइंस्टिचुट ), राजीव मिसर (सदस्य,इंस्टिचुट), श्री जगतमोहन शर्मा (प्रधान नगरपालिका, नूरमहल), राकेश कुमार (नगरपालिका, नूरमहल), राज कुमार मिसर (बजरंग दल, नूरमहल), डा परविंदर (नेत्र विशेषज्ञ, सरकारी अस्पताल, नूरमहल), डा अमन सूद (मनोचिकित्सक, मुख्य सलाहाकर, सिविल अस्पताल, जालंधर) अतिथिगण विशेषरूप से पधारे।

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