जालंधर (मुनीश तोखी ) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा पी  ए  पी में शिवरात्रि के उपलक्ष्य में संगीत से ओत प्रोत एक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। भगवान शिव जी के चरणों में एक मंगल वंदना गाकर इसकी शुरूआत से माहौल को भक्ति मई बना दिया। इसी अवसर पर श्री आशुतोष महाराज जी की परम शिष्या साध्वी पंकजाभारती जी ने उपस्थित शिव भक्तों को भगवान शिव की लीलायों में छिपे अध्यात्मिक रहस्यों से अवगत करवाते हुए कहा कि भगवान शिव जो कि कल्याणकारी है, जल्दी ही प्रसंन होने वाले है। जो अपने हर भक्त की मनोकामना को पुरा करने में सक्षम है। एैसे प्रभु का सुन्दर रूप है शिव है। एक भजन जब कोई नही आता मेरा भोला आता है हर दुख की घड़ी में मेरे काम पर बिचारो की बौछार करते हुए कहा कि यह संसार की अटल सच्चाई है कि संसार के सारे नाते जीवन में कही न कही छुट जाते है या बुरे समय में हम से नाता तोड लेते है। लेकिन भक्त के परम हितैषी तो भगवान शिव है जो अपनी शरण में आए जीव को कभी भी निराश नही करते। आगे साध्वी जी ने कहा कि भगवान को तो बहुत से लौग मानते है लेकिन भगवान शिव को जानने वाले लोग बहुत कम है। जीव के जीवन का लक्ष्य ” शव तत्व से शिवतत्व तक जाना है” भाव यदि जीवन में ईश्वर की भक्ति नही है तो जीव का जीवन शव के समान है। प्रत्येक महापुरूष का यही कथन है जीव भक्ति को प्राप्त हो। आगे साध्वी जी ने भगवान शिव के अदभुत रुप के पीछे अध्यात्मिक रहस्य को अदघाटित करते हुए कहा कि भगवान शिव की जटाऔं में गंगा जी प्रतीक है अमृत रस का। यह अमृत रस साधक के अंतकरण में है। जीवन में संत की कृप्पा से यह अमृत प्राप्त होता है। हम भगवान शिव के मंदिर में बैल की प्रत्मिा देखते है यह प्रत्मिा प्रतीक है धर्म का बैल सदैव भगवान की और मुख करके बैठा है। लेकिन आज वर्तमान समय में धर्म का अर्थ कुछ और ही है।लेकिन हमारे संतो महापुरूषो के दृष्टि कौण में धर्म का भव है धारण करना। जब भक्त के जीवन में संत आते है। वह धर्म को प्रगट कर देते है। नामदेव जी के जीवन में जब धर्म प्रगट हुआ तो उन्होने कहा कि ” जब देखा तब गावा” भाव कि ईश्वर मानने का जानने का विष्य है। आगे साध्वी जी कहा कि बहुत सारे लौग शिवरात्रि के पावन दिवस पर भांग का या फिर किसी अन्य नशे का सेवन करते है और यदि इसके करने कारण पूछा जाए तो उनका कहना होता है कि नशे का सेवन भगवान शिव भी किया था। प्रिये भक्तो भगवान शिव ने भक्ति रूपी नशे का सेवन किया था। वह नशा नही किया जिसके सेवन से एक परिवार, एक नगर, देश आरै विश्व का नाश हौ। इस लिए अगर आप भी नशा करना चाहते हौ तो भक्ति रूपी अमृत रस का नशा करें जो जीवन को छीनता नही बल्कि जीवन को प्रदान करता है। इसी अवसर पर साध्वी रीना भारती जी, साध्वी रजनी भारती जी के द्वारा सुमधुर भजनों का गायन किया गया ।

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